हुश्न - इश्क
हुश्न - इश्क
ये हुश्न मेरा
बस तेरे लिए
तू जब तक है
बरबाद न हो।
पर इश्क सनम
है गरूर मेरा
बस इसके सिवा
कोई आबाद न हो।
गोविन्द व्यास -
९९२९१९९१६९
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